Friday, April 21, 2017

तमिलनाडु के किसानों का मार्मिक प्रदर्शन





दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहें तमिलनाडु के किसानों ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। पीएम मोदी तक अपनी बात पहुंचाने के लिए ये किसान अजीब तौर-तरीके अपना रहे हैं। प्रतिकात्मक रूप से कभी इंसानों की खोपड़ियों के कंकाल सामने रखकर बैठ जाते हैं तो कभी घास खाते हैं और कभी चूहें। साड़ी भी पहन लेते हैं। हर दिन अलग-अलग तरीकों से प्रदर्शन किया जाता है। इनके इसी तरह के तरीकों के चलते आम लोगों के साथ-2 मीडिया का ध्यान भी इन किसानों के आंदोलन पर गया है। इनके हालात देखकर किसी का भी दिल पसीज सकता है। उनके प्रति हमदर्दी पैदा हो सकती है। ये किसान पीएम मोदी को जंतर-मंतर पर बुलाना चाहते हैं ताकि अपनी व्यथा पीएम को सुना सकें! उनसे राहत पैकेज जारी करने के लिए राज़ी कर सकें। लेकिन पीएम ने अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है कि वो इन किसानों से मिलने जा सकते हैं।


दिल कहता है कि अगर पीएम मोदी इन किसानों से मिल लें तो एक बहुत अच्छा संदेश जाएगा। लेकिन दिल के साथ-साथ थोड़ा दिमाग़ लगाने में कोई हर्ज नहीं है। ख़बर है कि करीब 37 दिन से ये किसान आंदोलनरत हैं। इस दौरान ये किसान अरुण जेटली, राजनाथ सिंह, उमा भारती और राधा मोहन सिंह जैसे नेताओं से मिल चुके हैं। मद्रास हाईकोर्ट और राज्य सरकार के आदेश के बाद कोऑपरेटिव बैंकों ने इनका कर्जा पहले ही ख़ारिज कर दिया है। अब इन किसानों की मांग है कि केंद्र सरकार इन्हें नये सिरे से राहत पैकेज जारी करे क्योंकि सूखे से इनकी फसल बर्बाद हो चुकी है और अब नई फसल के लिए इनके पैसे नहीं है। बाकी लोन(शायद दूसरे बैंकों से लिया गया) माफ़ करें। किसानों की मांग से कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन तथ्य ये है कि देशभर के किसान इसी तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। आज तमिलनाडु के किसान पीएम से मिलने की जिद पर अड़े हैं। इनकी मांगे मान ली गई तो महाराष्ट्र और दूसरे प्रदेशों के किसान भी इसी तरह की जिद कर सकते हैं। सवाल ये है कि क्या भारत सरकार का वित्त मंत्रालय इस हालात में है कि वो सारे देश के किसानों के लिए राहत पैकेज जारी कर सकता है? अगर ऐसा होता तो पीएम मोदी अब तक इन किसानों से मिल लिए होते! होना तो ये चाहिए कि किसानों को पहले अपनी राज्य सरकार पर दबाव डालना चाहिए। राज्य सरकारों का भी ये फर्ज है कि अपने-अपने प्रदेश के किसानों की समस्याओं के समाधान को लेकर टाल-मटोल वाला रवैया न रखें। तमिलानाडु सरकार को अपने स्तर पर और भी ज्यादा प्रयास करने चाहिए थे ताकि इन किसानों को जंतर-मंतर पर आकर प्रदर्शन करने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती। हालांकि किसानों की मांग जायज लगती है लेकिन पीएम मोदी द्वारा प्रदर्शनकारी किसानों से नहीं मिलने की भी ठोस वजहें हैं। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार इन किसानों के आंदोलन के प्रति कैसा रूख अख़्तियार करती है।