Wednesday, March 18, 2015

ऐसे टलेगा 'आप' का संकट




                                     च्रित्र गुगल से साभार

       आआपा में मचे घमासान पर जहां कुछ लोग मज़े ले रहे हैं तो वहीं थोड़े बहुत ऐसे भी हैं जिन्हें ‘आप’ में चल रही एक-दूसरे पर कीचड़ पुताई वैकल्पिक राजनीति के लिए ख़तरा नज़र आ रही है। वे चिंता जता रहे हैं और बेहद दुखी हैं।  ये लेख ऐसे ही चिंतित जनों को समर्पित  है। भद्रजनों, सियासत में पाखंड का स्थान बहुत ऊंचा होता है। पाखंड बिना सियासत बहुत मुश्किल है। पाखंड सियासत का पानी बोले तो प्राण है!  इसके बिना सियासत की कल्पना न करे! ये वो ‘देव’ है जिसकी शुरुआत में सब लानत मलानत करेंगे लेकिन बाद में उसी के चरणों में दंडवत प्रणाम करते हैं। चाहे वो मोदी जी या अरविंद केजरीवाल ही क्यों न हो! आज के वक्त में सबसे ज्यादा पाखंड करने से बात बनती है। इसके दम पर बड़ी से बड़ी मुश्किल का सामना कर सकते हैं और पर्दा उठने तक आप हर लिहाज से सुरक्षित हैं। सच्चाई सामने आ भी जाए तो नया ढोंग कर सकते हैं! सब कुछ सही तरीके से किया जाए तो आपका बाल भी बांका न होगा। अच्छी बात ये है कि इस मामले में बंदा आत्मनिर्भर है बोले ते पाखंड की क्वालिटी कतई इनबिल्ट होती है!  किसी दूसरे से मार्गदर्शन की आवश्यकता इसमें नहीं होती।  थोड़ी सी ‘समझदारी’  से भी आसानी से वो होने का नाटक किया जा सकता है जो आप है ही नहीं! मनमोहन सिंह जी से इस मामले में बहुत कुछ सीख सकते हैं! बहुत से लोग उनकी इसी ख़ासियत की वजह से आज भी अपना गुरु मानते हैं। वो कई सालों तक पीएम होने का अभिनय जैसा करते रहें! पाखंड की कला जीवनदायिनी, मान- सम्मान, रुपया बरसानी और कुर्सीदायिनी है। पाखंड कला से लैस होकर ही इंसान दुनिया में पैर रखता है। ये संकट लाने वाली है तो संकटमोचक भी है।

      सुधीजनों, कोई भी कला अपना इस्तेमाल हमेशा सतर्कता से और लिमिट में करना मांगती है क्योंकि असावधानी होने पर सभी तरह के दंड मिल सकते हैं! कई आध्यामिक गुरु और संत इस कला के अत्यधिक उपयोग के चलते पहले जहां करोड़ों-अरबों के स्वामी बने, बाद में उन्हें जेल में चक्की पीसने का काम करना पड़ रहा है। आपकी पार्टी की समस्या भी यही है! ये रोज़ सामने आ रहे नए- नए स्टिंग से तंग है। पार्टी को बचाव का कोई तरीका नहीं सूझ रहा है! शायद आपको पता नहीं कि आपकी पार्टी भी पहले पाखंड मोड में थी! लेकिन अब सबको पता चल चुका है कि कैसे अपने को सबसे अलग बताने वाली आपकी पार्टी भी वही कर रही थी जो दूसरे दल करते हैं। जनता से सब छुपा कर रखा! जिसके चलते विधानसभा चुनावों में अभूतपूर्व सफलता मिली। 67 सीटें मिल गई। लेकिन पार्टी की भूख ख़त्म नहीं हुई!  बड़ी होशियारी से पार्टी के ‘सुरक्षागार्डों’ की कुर्सी छीनने के चक्कर में लग गई। बस यही सारा खेल खराब हो गया। जिस पाखंड पर पर्दा डाल रखा था वो स्टिंग के जरिए सामने आ रहा है।

      मुसीबत बहुत बड़ी  है लेकन हे ‘महापुरुषों’ आप कतई चिंता न करे। इसका उपाय है कि अपना सारा अनुभव लगाते हुए फिर नया पाखंड रचो। पाखंड की वजह से मुसीबत आई है तो पाखंड से ही जाएगी! साथ ही जोरदार तरीके से अपना बचाव करो। जो कीचड़ की नदी बह रही है उसमें अपने विरोधियों को डुबा दो। ऐसा न हो सके तो कीचड़ को उनपर लपेट दो। ऐसा करने के नुकसान भी हैं लेकिन इसके दुष्प्रभावों की कतई चिंता न करो। जनता की याददाश्त बहुत कमजोर है। कुछ ही दिनों में फ्री की सुविधाओं के चक्कर में सब कुछ भूल जाएगी। जनता ये भी जानती है कि सभी सियासी दल पाखंडी हैं। आप की पार्टी के मुखिया भी तरोताजा हो गए हैं। पार्टी  भले ही बीमार हो उसे खांसी के दौरे पड़ रहे हों लेकिन मुखिया जी की सेहत में गजब का सुधार हुआ है। उनकी खांसी भी अब ठीक हो गई है। अब वो आ गए हैं तो  सब संभाल लेंगे। इसलिए दुखी होना बंद करो और मुखिया जी के क्या करते हैं उसका इंतज़ार करो! आप अपने स्तर पर कीचड़ मलना जारी रख  सकते हैं। जनता आपका भला करेगी और धीरे-धीऱे आपके कष्टों का निवारण होने लगेगा।