Monday, March 16, 2015

बीजेपी-पीडीपी का बेमेल गठजोड़

बीजेपी-पीडीपी गठजोड़ से ऐसी आवाजें आ रही है जैसे बुढ़ापे में हड्डियों के चटकने की आती हैं! अब टूटी कि तब टूटी!  दोनों दलों के गठजोड़ को देखकर उस बंदे की याद आ रही है जो दूसरों को ‘मिलावटी’ रंगों से होली न खेलने की नसीहत दे रहा हो लेकिन खुद (बीजेपी) ‘मिलावटी’ (पीडीपी) रंग से होली खेलने पर आमादा है! जबकि दूसरा (पीडीपी) पहले से ही ‘असली’ रंगों से खेलना चाहता है! ‘मिलावटी’ रंगों का साइड इफैक्ट लाजमी है। महबूबा के लोगों ने अफ़ज़ल की बॉडी की मांग रख दी और पाकिस्तान की तरह जिद पर अड़ गए हैं जो कश्मीर से आंख हटाने को तैयार नहीं! मुफ्ती एंड कंपनी ने गिरगिट की तरह रंग बदला और इधर देश के बाकी नेता पेट्रोल की माफिक भड़क कर देशभक्ति से भरपूर भाषण और भड़ासगिरी कर रहे हैं! करे भी क्यों न!  मौक़ा मिले तो कौन न लपक ले? बैट्समैन, लॉलीपॉप जैसा कैच उठाए तो फील्डर क्या छोड़ देगा? और जो छोड़ दे तो  देखने वाले जमकर लानत-मलानत करेंगे, बोनस में गालियां और जाने क्या-क्या मिलेगा सो अलग! खाली  बातों के वीर एकदम भौंचक हैं! बिल्कुल आंधी में गधे की तरह!  कांटे से कांटा निकलने की तर्ज पर कैंसर का ईलाज कैंसर के कीटाणुओं से नहीं होता!  उम्मीद है झोला छाप डॉक्टरों को समझ आ गई होगी!

इधर बेमौसम की बरसात ने सबका  मज़ा किरकिरा कर दिया है!  दिल इसलिए बैठ रहा है भाई कई किसानों की गेहूं और आलू की फसलें चौपट हो गई है! पहले ही बढ़े सेल्स टैक्स से होने वाली महंगाई की तलवार सिर पर लटकी है कि इस बारिश के जलवे से महंगाई सुरसा के मुंह के जैसे बढ़ जाने के पूरे चांस हैं! अपने ऑफिस और घर को छोड़ सारे जहां की ख़बरें रखने वालों की माने तो इस बारिश ने किसानों की तैयार फसलों का बेड़ा गर्क कर दिया है! क्या वजह है कि जिस बारिश के लिए अर्जी पिछले मॉनसून (जब बारिश बहुत कम हुई थी) में भेजी गई थी उस पर कार्रवाई अब हो रही है?  बारिश की जिम्मेदारी इंद्र देवता पर है।बहुत संभव है कि मंदी की मार से परेशान इंद्र देवता ने भी अपने ऑफिस में कुछ कम वेतन वाले क्लर्कों की भर्तियां की हैं उसमें कई क्लर्क भारतीय मूल के हैं! ये सब उन्हीं का किया धरा हैयहां कभी कोई काम बिना  मुट्ठी  गर्म  किए सही और वक्त पर किया है जो इंद्रलोक में करेंगे?  आगे भी यही होने का पूरा अंदेशा है! भविष्य में कभी समय पर सही  जगह पर सही से बारिश हो जाए तो समझ लेना कि इनको बोनस मिल गया है इसलिए इतरा रहे हैं! वहीं अगर बारिश से महंगाई बढ़ी तो लोग यही कहेंगे कि सेल्स टैक्स से डर नहीं लगता साहब, बेमौसम की बारिश से लगता है!  इंद्र देवता के ऑफिस में बैठे उन क्लर्कों से डर लगता है जो भारतीय है!

लोकतंत्र में जनता का हाल उस ख़रबूजे की तरह होता है जिसे हर हाल में कटना होता है! सत्ता पक्ष की घणी  दूरदृष्टि और मेहनत से तैयार वाला वित्तीय खर्चों और आमदनी से संबंधित कागजी पुलिंदा बोले तो बजट में सर्विस टैक्स का बढ़ना हो या विपक्ष की बंदरगिरी  यानि कि चित भी मेरी पट भी मेरी, नहीं तो उछलकूद और गजब का हंगामा!  हर हाल में जनता रूपी खरबुजा फांक-फांक होना तय है! आप चाहे तो लोकतंत्र को चाकूतंत्र कहकर भी अपना तंबुरे की गैस बोले तो पेट की भड़ास निकाल सकते हो!  बहरहाल  ‘चाकूतंत्र’ से आप बचे न बचे लेकिन खाने-पीने, -झूमने-गाने और उछलकूद के त्यौहार होली में आप मिलावटी रंगो और मिठाईयों से ऐसे ही बचना जैसे दुकानदार उधार मांगने वालों से बचता है!