Thursday, March 12, 2015

झूठ बोलने पर कौआ नहीं काटता

झूठ बोले कौआ काटे! हम सभी ने सुना है। ऐसा इसलिए कहा जाता है कि ताकि लोग झूठ बोलने से बचें और सदा सत्य बोलें। और अगर झूठ बोला तो काला कौआ काट लेगा! क्या वाकई कौआ काटता है? अपने आपको  सफल  मानने वाले और अरबपति (जिनमें नेता, व्यापारी भी शामिल)  अगर इस  झूठ बोले कौआ काटे वाली बात पर विश्वास करते  तो क्या वो अरबपति बन जाते! मेरा मतलब ये है कि अगर वो झूठ बोलने से डरे होते तो क्या वो उस मुकाम को छू पाते जिस मुकाम पर वो आज हैं!

बचपन से ही हमें सच बोलने की सीख दी जाती है। झूठ बोलना पाप है, सदा सच बोलो जैसे उपदेश रोज़ सुनाए जाते रहे हैं। माता-पिता और हमारे गुरुजनों का हमेशा से ये मानना रहा है कि एक अच्छे इंसान की पहचान ही यही है कि वो सदा सच बोलता है। ये सीख आज भी उसी तरह दी जा रही है बिना इस बात की परवाह किए कि आज ज़माना कितना बदल गया है। आधुनिक समय में सफलता के लिए झूठ  बोलना कितना ज़रुरी हो गया है! बच्चे इस ‘अनावश्यक ज्ञान’ पर बड़ों से सवाल-ज़वाब नहीं करते अन्यथा पलटकर एक बार ज़रूरपूछते कि क्या आप हमेशा ही सच बोलते हैं? अभी तक आप बिना झूठ  बोले ही इतने आराम से गुज़र-बसर कर रहे हो? बड़े आए सच बोलने की सीख देने वाले! सच्चाई ये है कि जो जितना बड़ा झूठा होता है, ज़िदंगी में आगे बढ़ने और शान से जीने के उसके अवसर उतने ही ज़्यादा होते हैं!

अब देखिए न, नेता लोग अगर सच बोल दें कि हमने इतना माल डकार लिया! हमारे इतने करोड़रुपये स्विस बैंकों में जमा हैं! हमने वास्तव इतने अपराध किए हैं!  हत्या की है! बलात्कार किए हैं! लोगों को लूटा है, उन्हें धोखा दिया। वादे करके कभी पूरे नहीं किए हैं।लोगों को आपस में लड़वाते हैं!  हम राजनीति में सेवा करने नहीं बल्कि मेवा खाने के लिए आना चाहते हैं!  मंत्री और उनके संतरी ये सच बोल दें कि हम अव्वल नंबर के शातिर चोर हैं। हमने पता भी नहीं चलने दिया और ऑफिस का ऐसा सामान जो आसानी से अपने घर आ सकता था उसे अपने घर लाकर पटक दिया है! हमारी वजह से देश को इतना नुकसान हुआ है! हमने देश सेवा की बजाए जमकर सियासत की है। विरोधियों को ठिकाने लगाना और अपनो का काम कराना ही हमारी दिनचर्या रही है तो क्या होगा?  होगा क्या? आधे से ज़्यादा नेता, मंत्री-संतरी जेल में चक्की पीस रहे होंगे!  नेताओं का एक तरह से अकाल पड़ जाएगा! उतने नेता बाहर नहीं होंगे जितने ज़ेल में चक्की पीस रहे होंगे!  हमारे ऑफिस जाने वाले भाई -बंधु अच्छे से जानते हैं कि कभी- कभी झूठबोलना कितने काम आता है! ऑफिस के सीनियर लोगों का बस चले तो अपने से जूनियर और चपरासी को कभी छुट्टी लेने ही न दें। भला हो झूठ  बोलने के गुण का, जरूरत पड़ने पर क्या जूनियर, क्या चपरासी कोई न कोई झूठ बोलकर छुट्टी ले ही लेते हैं। 

आप अपने आस-पास ही नज़र उठा कर देख लो। ज़रूरत के वक्त आप सब को भी कैसे झूठ बोलना पड़ता है। जीवन के हर क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को किसी न किसी रूप में झूठ बोलना ही पड़ता है।  दूसरी तरफ अगर आपने सच बोलना जारी रखा तो भयानक मुसीबतें काले साए की तरह आपके पीछे पड़ जाएंगी! आपके अपने ही आपको छोड़कर चले जाएंगे! क्षण भर में ही अपने, पराए हो जाएंगे। लोग आपको पागल हटा हुआ, खिसकी हुई बुद्धि का, और न जाने क्या-क्या कहेंगे! ऐसे समय कोई आपका साथ दे न दे, दुर्भाग्य जरूर देगा!  हालत ऐसी हो जाएगी कि भगवान भी आपका भला नहीं कर सकता! न घर के रहेंगे न घाट के!

सबक ये  है कि भैया आधुनिक सभ्य समाज में अगर शान से आगे बढ़ना है, रुतबे के साथ जीना है तो आज से ही झूठ को कोसना बंद करें! साथ ही ढंग से झूठ बोलने के तौर-तरीकों को सीखें! अपने आप भी सीखें और दूसरों को भी प्रेरित करें! हो सके तो अनुसंधान करें! उचित तरीके से झूठ बोलने के शिक्षण-प्रशिक्षण की व्यवस्था करें! अपने बच्चों को सच बोलने के घातक परिणामों से अवगत कराने के साथ-साथ ही जीवन में आगे बढ़ने में झूठ बोलने का क्या महत्व है ये भी अवश्य बताएं! बताना क्या है जी, ख़ुद प्रैक्टिकल कर के दिखाएं! नया ज़माना है!‘ख़ुद ही सीख जाएगा’ वाली धारणा को छोड़ दें! झूठ बोलने से कौआ नहीं काटता! कहीं ऐसा न हो कि जबतक बच्चे को झूठ की महिमा का ज्ञान हो तब तक बहुत देर हो जाए!  

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