Friday, January 7, 2011

'झूठ' के बिना तो भैया काम ना चले!!!!!!!

          बचपन से ही हमें सच बोलने की सीख दी जाती है। झूठ बोलना पाप है, जैसी बातें नित्य सुनाई जाती हैं।  सदा सत्य बोलें क्योंकि सच बोलने से ही आप एक अच्छे इंसान बन सकते हैं। ये रिवाज़ आज भी उसी तरह जारी है। बिना इस बात की परवाह किए कि आज ज़माना कितना  बदल गया है और आधुनिक जीवन में सफलता के लिए झूठ बोलना कितना ज़रूरी है! चूँकि इस मुद्दे पर बच्चें अपने बड़ों से ज़्यादा  सवाल जवाब नहीं करते वरना पलटकर एक बार ये ज़रूर पूछते कि क्या आपने कभी झूठ नहीं बोला?    क्या आप बिना झूठ बोले ही इतने आराम से ज़िन्दगी बसर कर रहें हैं?  बड़े आए सच बोलने  की सीख देने वाले!  मज़े की बात तो ये है की घर के सभी सदस्य भी  इस बात से भली प्रकार परिचित होते हैं  कि झूठ बोले बगैर सामान्य ज़िन्दगी जीना कितना मुश्किल है!
         ज़रा ग़ौर फ़रमाए.... अगर नेता लोग सच बोल दें  कि हमने इतना माल डकार लिया!   हमारा इतना माल  स्विट्ज़रलैंड  के बैंकों में जमा है, चूँकि हम अव्वल नंबर के शातिर  चोर  हैं  इसीलिए  दफ़्तर का बहुत सा सामान ( जिसे ले जाने  में कोई बहुत बड़ी दिक्कत न हो, भले ही सामान काम आए या न आए)  अब हमारे घर की शोभा बन गया  है!  हमने इतनी मासूम लड़कियों से  बलात्कार किया है! इतने लोगों को ठगा  है! हमारे कारण देश का इतना नुक़सान हुआ है!  हम राजनीति में देश की सेवा के लिए नहीं बल्कि मेवा खाने तथा सत्ता और कुर्सी  की  अपनी भूख के कारण आए हैं! इसीलिए हम वोट पाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं! वगैरह-वगैरह .....तो क्या होगा?  होगा क्या!  एक  मजबूर लड़की का रेप करके अपने आपको नामर्द बताने वाले विधायक जी जेल  में  चक्की पीस रहे होंगे. बहुत से मंत्री-संत्री भी वहीं होंगे.......ये तय है कि जेलों में  नेताओं की सँख्या दूसरे अपराधियों से  ज़्यादा होगी.  जेल के बाहर नेताओं  का अकाल हो जाएगा तो फ़िर देश कौन चलाएगा क्योंकि मुठ्ठीभर ईमानदार लोग(इससे ज़्यादा होंगे भी नहीं)  राजनीति को दूर से ही नमस्कार करते हैं.   इसीलिए नेताओं  को यहीं छोड़ते हैं क्योंकि नेता एक आवश्यक बुराई है.         

     चलिए हम अपने आप  को ही परखते हैं .....क्या बिना झूठ के बगैर रहना इतना आसान है?  क्या ज़रुरत के वक़्त हम भी झूठ पर झूठ नहीं बोलते हैं?  बोलते हैं...लगभग सभी बोलते हैं साब! और जिस दिन सच बोलना शुरू कर दिया तो  भयानक मुसीबतें  काले साए की तरह पीछे पड़ जाएंगी! आपके दोस्त आपको छोड़कर चले जाएँगे! , क्षणभर में ही अपने, पराए हो जाएँगे! ऐसी अवस्था में आपका कोई साथ दे न दे, दुर्भाग्य  ज़रूर देगा! लोग आपको पागल, हटा हुआ, खिसकी हुई बुद्धि  का,  और न जाने क्या-क्या  समझेगें! भगवान भी आप का भला नहीं कर सकता! समझे ज़नाब!
       इसीलिए अगर आप सभ्य समाज का हिस्सा बनकर इज्ज़त से जीना  चाहते हैं तो आज से ही यानी कि नए साल में झूठ को कोसना बंद कीजिए और झूठ बोलने के तौर-तरीकों पर ख़ासा अनुसंधान कीजिए! झूठ बोलने के उचित शिक्षण-प्रशिक्षण की व्यवस्था पर ज़ोर दीजिए! अपने बच्चों को सच बोलने के घातक खतरों के बारे में  बताने के साथ-2 झूठ बोलने का महत्त्व भी ज़रूर बताएँ!  बल्कि मैं तो ये कहूँगा कि  वाकायदा प्रैक्टिकल करके दिखाएँ.  'ख़ुद ही झूठ बोलना  सीख जाएगा' वाली धारणा को छोड़ दीजिए क्योंकि नया ज़माना है कहीं बहुत देर न हो जाए और आपका बच्चा पीछे रह जाए!  यक़ीन मानिए ऐसा करके आप उनको भविष्य में आने वाली  तमाम मुश्किलों से बचा देगें! मैंने अधिकांश लोगों को झूठ की सहायता से अपनी नैया पार लगाते हुए देखा है! बाकी तो आप सब जानते ही हैं! ग़र फ़िर भी कोई शक़ या दुविधा हो तो टिप्पड़ी करके ज़रूर बताएँ क्योंकि आप इस विषय पर क्या सोचते हैं ज़ाहिर है मैं भी ज़रूर जानना चाहूँगा!