Saturday, December 11, 2010

जब तक हमारा ज़मीर नहीं जागेगा!

     भ्रष्टाचार के  बारे में आजकल बहुत चर्चा हो रही है . ये  जानकार और भी  अच्छा  लगता है कि  भ्रष्टाचार के प्रति लोग अपनी नारज़गी जमकर प्रदर्शित कर हैं. वास्तव में ईमानदार और  हर तरह से निर्दोष  लोगों को तो  शायद ये उम्मीद भी होगी कि अब भ्रष्टाचारियों की ख़ैर नहीं.  

लेकिन सवाल फ़िर वही कि क्या किसी तरीके से भ्रष्टाचार रुक सकता है?  चलिए इस सवाल के उत्तर की तलाश करते हैं.
         


         हाल ही में हुए एक सर्वे में जो तथ्य सामने आए हैं उनका यदि गौर से अध्ययन  किया जाए  तो ज़ेहन में कुछ ऐसे सवाल आते हैं जिनका उत्तर तलाशना बिल्कुल  भी आसान नहीं है.   सर्वे में एक तथ्य यह भी है कि भारत के ५४ प्रतिशत लोगों ने अपना काम करवाने के लिए कभी न कभी रिश्वत ज़रूर दी है. यानि हर दूसरा भारतीय भ्रष्ट है.  ये ५४ प्रतिशत लोग वो  हैं जिन्होंने  बड़े  प्यार  से इस  बात  को  स्वीकार  किया है.  ज़ाहिर है इनमें  से अधिकांश  ऐसे भी  होंगे  जिन्होंने  अपना काम करवाने  के लिए पैसे दिए हैं तो मौक़ा मिलने पर दूसरों से पैसे  लिए भी होंगे.


         मैं इसी बात को आगे बढ़ाते हुए ये कहना चाहता हूँ कि एक तरफ़ तो हम  भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ इतना हल्ला मचाते हैं दूसरी तरफ़ मौक़ा मिलने पर ख़ुद भी भ्रष्टाचार के गंदे नाले में बड़े मज़े से डुबकी लगाते है  बशर्ते इससे हमारा काम बनता हो!  यही नहीं सार्वजनिक स्तर पर  हर आपराधिक मामले में हमारी प्रतिक्रिया या आलोचना का शिकार दूसरा अपराधी होता है, वो अपराधी नहीं होता जो कि अपना है. चाहे उसने घूस ली हो या दी हो या फ़िर किसी का बलात्कार ही क्यों न  कर दिया हो.   क्या इस बात से आपको कुछ भी आश्चर्य नहीं होता कि केवल राजधानी दिल्ली में ही रोज़ एक बलात्कार की घटना होती है. पूरे देश में बलात्कार के मामलों  का कोई हिसाब है नहीं. देश भर में रोज़  न जाने कितनी हत्या और न जाने कितनी  ही भ्रष्टाचार की घटनाएँ होती होंगी.  हर तरह के अपराध बार-बार होते होंगे.  और जो अपराधी इन बलात्कार, हत्या,  भ्रष्टाचार  की घटनाओं और दूसरे कई अपराधों को अंज़ाम देते होंगे उन अपराधियों के  बारे में अधिकांश मामलों में उनके घरवालों , निकट संबधियों, चश्मदीदों  या फ़िर अपराध करने वालों के कुछ दोस्तों को ज़रूर पता होता होगा.  लेकिन शायद ही कभी ऐसा होता कि कोई माँ, बाप ,भाई, बेटा, बहन, दोस्त या रिश्तेदार आगे आ कर ये बताएँ  कि मेरे माँ, बाप ,भाई, बेटा, बहन, दोस्त या रिश्तेदार ने ये ग़लत काम किया है  इसलिए इसे सज़ा दो.  हालंकि कुछ मामलों में रिश्तेदार या दोस्त तो सामने आ भी  जाते हैं लेकिन ख़ून के रश्ते वाले तब  तक सामने नहीं आते जब तक कि बे ख़ुद अपराधी के शिकार न हों. भ्रष्टाचार के मामलों में भी ठीक यही होता है. कभी कोई ये नहीं कहता कि मेरे बेटे या बाप ने रिश्वत ली है.
                 
        हालांकि मेरा तो ये भी मानना है कि  जो लोग जिस काम का सरकार से पैसा लेते हैं अगर वो उस काम को सही से  न करें या ड्यूटी के समय ख़ाली बैठे  या ५ पैसे की भी सरकारी चीज़ बिना अनुमति के घर ले जाएँ या किसी भी तरीके से अपने पद का दुरूपयोग करें तो वो लोग भी भ्रष्ट हैं. भले ही वो घूस न लेते हों. इस हिसाब से देखा जाए तो हिन्दुस्तान में बहुत कम लोग ईमानदार होंगे.
       




     मैं सिर्फ़ ये कहना चाहता हूँ कि जब तक हमारा ज़मीर नहीं जागेगा,  ईमानदारी, कर्तव्य परायणता और नैतिकता जैसे बुनियादी मूल्यों को हम अपने जीवन में  नहीं उतारेंगे तब तक किसी भी अपराध को सिर्फ़ क़ानून के दम पर रोकना लगभग असंभव है. अगर आपको ये बाते बोर करती हों तो वादा कीजिए कि आप कभी भी भ्रष्टाचार या किसी भी अपराध को लेकर कभी किसी को  न तो कोसेंगे और न ही उससे अच्छा या ईमानदार इंसान बनने को कहेंगे.  एक भ्रष्ट व्यक्ति या अपराधी दूसरे भ्रष्ट व्यक्ति या अपराधी से ये कहे कि तू ईमानदार और अच्छा इंसान बनकर रह तो इससे बड़ी हास्यास्पद बात क्या होगी?  और आप देख सकते हैं कि हमारे देश में कुछ ऐसा ही हो रहा है.  ये तय है कि इसका परिणाम कुछ भी नहीं निकलेगा. क्योंकि जो कोई भी भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ उठा रहा है उनमें से ज़्यादातर किसी न किसी रूप में ख़ुद भी भ्रष्ट या दोषी हैं. वो चाहे मीडिया वाले हों, नेता हों या फ़िर आम जनता !   


अपील-  
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