Saturday, November 13, 2010

कीचड़ से कीचड़ साफ़ नहीं होती----- बंधुओं

        कांग्रेस  अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गाँधी के ख़िलाफ़, आर.एस.एस. के पूर्व सर संघचालक श्री के सी सुदर्शन के उस बयान की निंदा की ही जानी चाहिए जिसमें उन्होंने श्रीमती गाँधी पर आधारहीन आरोप लगाए थे.  किसी भी व्यक्ति के ख़िलाफ़ कोई भी आरोप लगाने से पहले, आरोप लगाने वालों को आरोपों की प्रकृति और उनका आधार के बारे में पता होना चाहिए. जिस पर आरोप लगाया जा रहा है उस व्यक्ति की  गरिमा का भी पूरा ख़्याल रखना चाहिए.  श्रीमती गाँधी कोई आम इंसान नहीं हैं. वे एक राष्ट्रीय पार्टी की अध्यक्ष है. दुनिया के शीर्ष दस बड़े शक्तिशाली नेताओं में उनकी गिनती होती है. उन पर लगाए गए  श्री सुदर्शन के आरोपों में भी कुछ दम नहीं हैं. स्पष्ट है कि श्री सुदर्शन ने यहाँ पर ग़लती की,  और एक  ग़ैर जिम्मेदाराना बयान दिया. जिसके फलस्वरूप उनके ख़िलाफ़ जबरदस्त प्रदर्शन हुए और कई मुक़दमें भी दर्ज हुए. 
                    


            लेकिन उससे भी ज़्यादा ग़ैर जिम्मेदाराना है इस बयान के प्रति कांग्रेस  के नेताओं की अतिउग्र प्रतिक्रिया और उसके कार्यकर्ताओं द्धारा विरोध प्रदर्शित करने का तरीका. चूँकि इस बयान से उनकी प्रिय नेता की छवि ख़राब हुई थी या फ़िर कहें की उनकी नेता का अपमान हुआ इसलिए उन्होंने कई स्थानों पर जमकर  तोड़-फोड़  कर अपना विरोध जताया और दिल्ली और उत्तर प्रदेश में आर.एस.एस. के मुख्यालयों पर जमकर हंगामा किया गया. इतना ही नहीं कांग्रेस के नेताओं ने भड़काने वाले भाषण भी दिए जिससे इसके कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊँचा हुआ और उन्होंने मुक्त होकर उत्पात मचाया.   इससे आम जनता ख़ासकर कामकाजी वर्ग को काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा.   विरोध का ये ढंग कीचड़ को कीचड़ से साफ़ करने की परंपरा की याद दिलाता है . जो की हमारे देश में  कुछ ज़्यादा ही फलफूल रही है. 
       

   केवल एक बयान पर कांग्रेसी इतना भड़क गए!
   गुंडों की तरह तोड़-फोड़ करने सड़क पर उतर गए!
   जमकर उधम मचाया, पुलिस को भी खूब छकाया! 
   
  गुंडागर्दी ऐसी कि कईयों के सिर  भी तड़क गए!





             ये वही कांग्रेसी नेता हैं  जिन्होंने महँगाई के ख़िलाफ़ तो कभी कोई बयान नहीं दिया. लेकिन   एक विवादित बयान  के ख़िलाफ़ इस तरह उग्र प्रदर्शन करने के लिए अपने कार्यकर्ताओं को  जमकर भड़काया.  और ये वही  कांग्रेसी कार्यकर्ता हैं जो महँगाई से त्रस्त देश की जनता के लिए कभी सड़कों पर नहीं उतरें लेकिन एक आधारहीन बयान के कारण उत्पात मचाने में इन्होंने  बिल्कुल भी संकोच नहीं किया


             ये विचित्र है कि देश पर हमला करने वाले आतंकवादियों को सज़ा दिलाने के लिए इन्होंने कभी  कोई शालीन प्रदर्शन तक भी नहीं किया और भविष्य में कभी करेगें इसकी भी कोई उम्मीद नहीं.  आतंकवाद से पीड़ित  भारतवासियों  के ज़ख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश इस पार्टी के नेताओं या इसके कार्यकर्ताओं ने कभी इतने दिल से नहीं की जितने दिल से इन्होंने अपनी नेता को ख़ुश करने की कोशिश की.  ज़ाहिर है ये सब अपना भला देखते हैं. जनता की इनको तनिक भी परवाह नहीं. अन्यथा १२/११/२०१० को विरोध प्रदर्शन करते वक़्त कम से कम जनता का ख़्याल तो रखते.  


                 भ्रष्टाचार को लेकर आजकल बवाल मचा हुआ है. कांग्रेस इस मुद्दे पर सत्ता की ख़ातिर समझौतावादी रवैया अपना रही है.   दूरसंचार मंत्री  ए.राजा के ख़िलाफ़ कांग्रेस सरकार का कोई भी कार्रवाही न करना इस बात का पुख्ता सबूत है.  हो सकता है भारी दवाब में देर-सबेर राजा की छुट्टी हो भी जाए लेकिन इतने दिनों तक  ए. राजा का कैबिनेट मंत्री बने रहना और सुप्रीम कोर्ट का  ए. राजा  के मंत्री बने रहने के  औचित्य पर ही सवाल उठाना, कांग्रेसजनों के लिए कभी  कोई शर्मिंदगी का कारण नहीं बनता. आखिर क्यों ?  क्या सत्तासुख  के लिए कांग्रेसी  कुछ भी कर सकते हैं.  अगर हाँ तो ये देश के लिए कतई शुभ नहीं है. कांग्रेस  को ये बताना ही होगा कि आम आदमी कांग्रेस पर भरोसा करे तो क्यों करे?  देश से भ्रष्टाचार को जड़ से ख़त्म करने की बात करने वाली कांग्रेस आज अपने ही किए वादे  को भूल गई.  क्यों ?  सिर्फ़ सत्ता के लिए न ! अगर ऐसा है तो  आम आदमी को भी आपसे कोई सहानुभूति नहीं है.  सुना तुमने......