Wednesday, November 10, 2010

बंद करो ये हाहाकार !!!!!!

मत मचाओ कोई भी शोर!
और बंद करो ये हाहाकार!
आसमान तो नहीं टूट पड़ा!
ग़र फ़िर किसी ने थोड़ा सा माल लिया डकार!


भई बात है ये बिल्कुल ही सच्ची!
हराम की दौलत लगती है अच्छी!
ईमानदारी का राग अलापते जो!
अक्ल है उनकी बिल्कुल ही कच्ची!


वैसे भी हमाम में सब नंगे है!
ऊपर से चोरों को पकड़ने में भी बड़े पंगे हैं!
चोरी सिद्ध हुई तभी चोर, चोर है!
और अगर न हो सकी तो हर-हर गंगें है! 


इसीलिए हर तरफ़ है एक ही आवाज़!
माल उड़ाना यहाँ बन गया है रिवाज़!
अब हर तीसरा व्यक्ति हो गया है भ्रष्ट!
इतना बदल गया है भारतीय समाज!


ग़र चाहते हो भ्रष्टाचार मिट जाए! 
बेईमान अपने पदों से हट जाएँ! 
तो इससे पहले एक काम ये भी करें! 
कि हम सब अपने सोए ज़मीर को जगाएँ! 


फ़िर अपने लालच पर करें प्रहार!
न दें इसको तनिक भी आहार! 
वक़्त बदलते देर न लगेगी! 
जल्दी ही आएगी देश में ईमानदारी की बयार!