Monday, October 4, 2010

देख लो दुनिया वालों ...


आख़िर वो दिन आ ही गया जिसका इंतज़ार भारतवासियों के साथ -२ विदेशी भी कर थे.  जी हाँ ....मैं  राष्ट्रमंडल खेलों की ही बात कर रहा हूँ . राष्ट्रमंडल खेलों के शानदार उदघाटन  के बारे में तो  सभी  सोच रहे थे. लेकिन ये उदघाटन इतना भव्य होगा इसकी कल्पना आयोजकों के अलावा शायद बहुत ही कम लोगों ने की होगी. 

                        अभी कुछ दिन पहले तक इन खेलों के आयोजन की तैयारियों को लेकर आयोजनकर्ताओं की जमकर आलोचना हो रही थी जिसके अपने कारण थे.  अब जब इन खेलों का भव्य शुभारम्भ हो चुका है तो मेरे जैसे आलोचक भी आलोचना छोड़ खेलों की शुरुआत देखकर ही गर्व से फूले नहीं समा रहे हैं . फक्र करने की बात भी तो है. उदघाटन समारोह ने जो समा बाँधा है उसे इतनी आसानी से नहीं भुलाया जा सकता. देखने वालों ने दाँतों तले उँगलियाँ दवा ली. शायद  उन्हें भारतवर्ष की भव्यता और विविधता का अंदाज़ा नहीं रहा होगा. मैंने इस समारोह का आनंद रेडियो पर लिया. मेरे मन में इस उदघाटन को सुनने के बाद जो भाव आए, उन भावों को मैं आपके साथ बाँटे बिना न रह सका. 


देख लो दुनिया वालों ...
मान लो ओ दीवानों ...
कितना प्यारा है ...
सबसे न्यारा है ...
इस पर हमको ...
बड़ा मान है ...
ये हमारी जान है ...
इतना प्यारा हमारा ...
हिन्दुस्तान  है ...
हिन्दुस्तान  है ...
सींचा इसको ...
शहीदों ने ...
अपने लहू से ...
क्या -२ गुजरी है इस पर ...
अब कहें क्या किसी से ...
रहे ये सलामत ...
इतना अरमान है ...
ये हमारी जान है ...
इतना प्यारा हमारा ...
हिन्दुस्तान है ...
अनेकता में एकता  ...
इसकी पहचान  है ...
हर रंग के फूल   ...
खिले हैं जिसमें  ... 
ये वो गुलिस्तां है ...
ये हमारी शान है ...
इतना प्यारा हमारा ...
हिन्दुस्तान  है ...
हिन्दुस्तान  है ... 
दिन-रात इसकी रक्षा ...
करते हैं हम ...
न दुश्मन का डर है ...
न ही तूफां का ग़म ... 
इस पर तो कुरबां ...
हमारी जां है ... 
ये हमारी आन है ...
इतना प्यारा हमारा ...
हिन्दुस्तान है ...
हिन्दुस्तान है ...