Monday, September 20, 2010

विज्ञापन जगत- एक भ्रमजाल !

'विज्ञापनों' की लुभावनी दुनिया...  
एक बहुत बड़ा भ्रमजाल है .
ग्राहकों को...
फँसाने की सोची समझी चाल है.
'विज्ञापनों' का प्रभाव भी ...
बेमिसाल है .
जिसके आकर्षण से बचना हो मुश्किल...
ये वो मायाजाल है. 
लेकिन अगर बच जाएँ तो ये...
अपने आप में एक कमाल है.
हाँ..इन पर यक़ीन करने वालों की...
ज़ेब से अवश्य निकल जाता माल है.  
इसीलिए अक्सर मेरे दिमाग़ में...
उठता एक सवाल है.
कि सबकुछ जानते हुए भी...
हम विज्ञापनों के फेर में आ जाते हैं.
और अक्सर बाद में  ...
बहुत पछताते हैं.
चलिए आप ही बताएँ...
कि इस बारे में आपका क्या ख़्याल है ?