Thursday, August 26, 2010

गुरुजी बन गए गुरुघंटाल.......


एक समय था .
जब भगवान से भी ऊँचा,
गुरूओं का स्थान था .
इन गुरुओं के ज्ञान की बदौलत ही,
सदियों तक हिन्दुस्तान,
फलता-फूलता रहा था.
ये वो समय था.
जब गुरु और शिष्य के बीच,
बड़ा ही आत्मीय सम्बन्ध था.
दोनों की अनुकरणीय जुगलबंदी के दम पर ही,
हमारा प्यारा भारत,
महान बना था ...........
लेकिन अब समय बदल गया है .
अब ही वो गुरु हैं ,
और ही उनका वो स्थान है 
आज के तो गुरु ही करते वो काम है ,
कि आज गुरु को गुरु कहना भी,
'गुरु' शब्द का अपमान है .