Thursday, April 8, 2010

ज़िंदगी के खट्टे-मीठे रंग

ज़िंदगी भी अजीब  रंग दिखाती है।
क़दम-२ पर इंसान को आजमाती  है।
कभी  मिलती है  ख़ुशी तो कभी ग़म,
कभी हिस्से में मायूसी भी आती है।



ज़िंदगी हंसने -हंसाने का नाम है.........


ज़िंदगी  हंसने -हंसाने  का नाम है।
ग़म में भी मुस्कुराने का नाम है।

क्या रखा है लड़ाई में  दोस्तों, ज़िंदगी प्यार से रहने का नाम है ।
लाखों -करोड़ों की इस भीड़ में,
कोई एक जो हो तक़दीर में,
जिसके बिना है हर ख़ुशी अधूरी,
ज़िंदगी उसे अपना बनाने का नाम है ।ज़िंदगीहंसने -हंसाने का नाम है।
ग़म में भी मुस्कुराने का नाम है ।
हांसिल करो वो मुक़ाम,
कि दुनिया करे तुम्हें सलाम,
अच्छी नहीं देश से गद्दारी दोस्त,
ज़िंदगी वतन पर मिटने का नाम है ।
ज़िंदगी हंसने -हंसाने का नाम है ।
ग़म में भी मुस्कुराने का नाम है ।