Friday, April 2, 2010

.........निगाहों का कसूर है

1. जब से मिली हैं  नज़रें , नींद आँखों से दूर है     वो कहते हैं हमें नींद न आने की बीमारी है
   हम कहते हैं ये उनकी निगाहों का कसूर है!

२. जमाने  की बेवफ़ाई ने दिए ज़ख़्म कुछ ऐसे
    कि वफ़ा  का मरहम भी कुछ काम न आ सका। 



३- करने को तो मोहब्बत वो भी करते हैं,
    पर  हम 'वो' नहीं, जिन पर वो मरते है।

४- मोहब्बत में कई  बार ऐसे लम्हें आते हैं,
    जब रातों में जागते हुए भी सपने आते हैं। 
     

5. प्यार के रिश्ते बड़े अनमोल,
   इन्हें चाहिए बस  मीठे बोल।