Saturday, September 25, 2010

घूमो प्यारे दिल्ली में...........

आओ प्यारे 'दिल्ली'  में....
घूमो प्यारे 'दिल्ली' में....
मंदिर- मस्जिद....
चर्च- गुरद्वारे....
देखो प्यारे 'दिल्ली' में ....
आओ प्यारे 'दिल्ली'  में....
घूमो प्यारे 'दिल्ली' में....
राष्ट्रमंडल खेल....
यहाँ पर होंगें....
देश-विदेश के खिलाड़ी होंगे....
ख़ुशी मनाते दर्शक होंगे....
क्या नेता क्या अभिनेता....
इन सब को देखो 'दिल्ली' में....
आओ प्यारे 'दिल्ली' में....
घूमो  प्यारे 'दिल्ली' में....
संसद भवन और इंडिया गेट....
अब देख ही डालो मत करो वेट....
चाँदनी चौक  और लाल क़िला....
साथ में देखो पुराना क़िला....
हर बात यहाँ की निराली है....
दिल को लुभाने वाली है....
है कुतुबमीनार भी 'दिल्ली' में....
आओ प्यारे 'दिल्ली'  में....
घूमो प्यारे 'दिल्ली' में ....
छोले -भठूरे और शाही क़बाव....
सब मिलते यहाँ जनाब....
गुलाब जामुन और जलेबी ....
जहाँ जाओगे वहाँ मिलेगी ...
जब भी खाने की बात चली....
सीधे जाना परांठे वाली गली....
गरमा-गरम ख़ास परांठे....
जमकर खाना 'दिल्ली' में....
आओ  प्यारे 'दिल्ली'  में....
घूमो  प्यारे  'दिल्ली' में....
हिन्दुस्तान का दिल है 'दिल्ली'....
अपने वतन की शान है 'दिल्ली'....
हर भारतीय की आन है 'दिल्ली'....
ऐतिहासिक और आधुनिक....
दोनो की पहचान है 'दिल्ली'.....
अब और ज़्यादा  क्या लिखूँ....
दिल्ली को ग़र जानना चाहें....
तो आ जाएँ  'दिल्ली' में....
फिर 'मेट्रो ट्रेन' में बैठकर देखो ....
मस्त  नज़ारे दिल्ली में....
आओ  प्यारे 'दिल्ली'  में....
घूमो  प्यारे  'दिल्ली' में....



        

           दो बातें - अगर दिल्ली की भीड़-भाड़ या  कुछ और छोटी -मोटी समस्याओं को अनदेखा कर दें तो अपनी दिल्ली वाकई बहुत ख़ूबसूरत है. चूँकि राष्ट्रमंडल खेल शुरू होने ही वाले हैं इसलिए देशी हों या विदेशी, दिल्ली आकर खेलों का मज़ा लें और समय निकालकर अपने मनपसंद स्थानों को भी ज़रूर देखें.

18 comments:

  1. बढ़िया सैर कराई है दिल्ली की

    ReplyDelete
  2. sach mein delhi ki baat nirali to hai hi....
    bahut achhi rachna....

    ReplyDelete
  3. बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
    कहानी ऐसे बनी– 5, छोड़ झार मुझे डूबन दे !, राजभाषा हिन्दी पर करण समस्तीपुरी की प्रस्तुति, पधारें

    ReplyDelete
  4. बहुत अच्छी प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  5. बहुत सुंदर। गर्व से कहो-हम दिल्ली में हैं।
    http://sudhirraghav.blogspot.com/

    ReplyDelete
  6. हमारे ब्लॉग पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए धन्यवाद् |
    आपका दिल्ली का चित्रांकन बहुत ही अच्छा लगा |
    बहुत दिनों से दिल्ली नहीं गया पर आपकी रचना पढ़ कर सब कुछ तरो-ताज़ा हो गया, आभार|

    ReplyDelete
  7. दिल्ली दिल वालो की है सैर कराने का धन्यवाद

    ReplyDelete
  8. poori delhi ghuma laye aap to.bahut khub.

    ReplyDelete
  9. bahut hi kavita
    mai chennai me aa gaya

    delhi ko bahut miss kerta hu

    ReplyDelete
  10. shahdra ke paar bahti jamuna ji ki dhara dekho
    upar chaale rail niiche motraa ka raala dekho..

    bahut khoob ...bhai aapki kavita padhke kahin aisa na ho paidal chalne ki bhi jagah na bache delhi m
    vaise hi suna hai rasto ko band kar rahe hai aam logo ke liye ....haan khas logo ke liye koi dikkat nahi hai .....
    acchi kavita likhi hai aapne ...banhaii

    ReplyDelete
  11. बहुत खूब, दिल्ली दिल वालों की ||

    ReplyDelete
  12. दिल्ली का चित्रांकन बहुत ही अच्छा लगा |

    ReplyDelete
  13. सैर कराने का धन्यवाद
    Chauhan Sahab

    ReplyDelete
  14. दिल्ली दिल है दिलवालों की ... पर अभी तो सजने की जुगाड़ में है .. पर ट्रेफिक जाम ...... अब क्या कहें ...

    ReplyDelete
  15. वीरेन्द्र जी, आपकी कविता पढ़ कर मन ललचा गया। काश हम भी जलेबी और समोसे का मज़ा ले सकते।

    ReplyDelete
  16. बहुत सुन्दर कविता लिखा है आपने! सही में दिल्ली है दिल वालों की!

    ReplyDelete
  17. सीधे जाना परांठे वाली गली....
    गरमा-गरम ख़ास परांठे....
    अरे भाई इस गली का कुछ अता पता तो बता दो तभी खायेंगे? नही तो आपके घर पर डेरा जमा देंगे फिर खिलाना गरमा गरम पराँठे। अच्छी लगी कविता। बधाई।

    ReplyDelete
  18. wow...aapne to kavita mein hi poori dilli dikha di...

    ReplyDelete