Monday, September 20, 2010

विज्ञापन जगत- एक भ्रमजाल !

'विज्ञापनों' की लुभावनी दुनिया...  
एक बहुत बड़ा भ्रमजाल है .
ग्राहकों को...
फँसाने की सोची समझी चाल है.
'विज्ञापनों' का प्रभाव भी ...
बेमिसाल है .
जिसके आकर्षण से बचना हो मुश्किल...
ये वो मायाजाल है. 
लेकिन अगर बच जाएँ तो ये...
अपने आप में एक कमाल है.
हाँ..इन पर यक़ीन करने वालों की...
ज़ेब से अवश्य निकल जाता माल है.  
इसीलिए अक्सर मेरे दिमाग़ में...
उठता एक सवाल है.
कि सबकुछ जानते हुए भी...
हम विज्ञापनों के फेर में आ जाते हैं.
और अक्सर बाद में  ...
बहुत पछताते हैं.
चलिए आप ही बताएँ...
कि इस बारे में आपका क्या ख़्याल है ?



18 comments:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति।

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  2. सही कहा है ....यदि फेर में न आयें तो कौन विज्ञापन पर इतना खर्च करेगा ?

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  3. अपना एक शेर पेश करता हूँ आपकी इस रचना के सम्मान में:-

    अपनी तरफ से भी सदा पड़ताल कीजिये
    यूँ ही यकीं करें न किसी इश्तिहार में

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  4. aapka aur mera ek hi khyaal h.....
    aap sahi h.
    good work sir

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  5. bhut bhut acha likha h apne.. very strong

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  6. आपने सही कहा कि विग्यापन एक भ्रमजाल है। मॉडल ऐसा करते हैं उनका तो चलो रोजगार है। मगर सचिन जैसे नामी खिलाड़ी भी इस दौड़ में दिखते हैं तो यह भ्रम और बढ़ता है।

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  7. बिल्कुल दुरुस्त कहा आपने ... विगयापन छलावा है ... भ्रंम जाल बुनते हैं ...
    अच्छी व्यंग रचना है ...

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  8. truly said...we are always influenced by adds,blindly ....

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  9. It's true that companies fool us through advertisements. But then God has blessed us with intellect to decide before spending money on such unnecessary things.

    nice post .

    .

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  10. बहुत बढ़िया लिखा है आपने! ये बात बिल्कुल सही है कि हम सब विज्ञापन देखकर उस चीज़ को तुरंत खरीदने के बारे में सोचते हैं और अगर उस विज्ञापन में हमारे पसंदीदार खिलाड़ी या फिल्मस्टार रहे तो हम दुबारा कभी नहीं सोचते और ये मानते हैं की सबसे उम्दा चीज़ है !

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  11. सब बाज़ार की माया है.

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  12. ‌अखबार टीवी से जुड़े लोगों की रोजी रोटी हैं ​विज्ञापन
    कई अच्छी चीजें भी बता जाते हैं ​विज्ञापन
    भ्रम तो हैं ही, पर प्रचार भी जरूरी है
    उपभोक्ता खरीदें सब आंखें खोल के
    और जानना अपने अ​धिकार जरूरी है

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  13. हम विज्ञापनों के फेर में आ जाते हैं.
    और अक्सर बाद में ...
    बहुत पछताते हैं.
    ekdum sahi likha hai.

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