Wednesday, September 8, 2010

भारत निर्माण का सच !!!!!!!!

सुनिए-सुनिए ओ श्रीमान !
भारत सरकार का ऐलान !
जोर-शोर से कह रही है !
हो रहा है भारत निर्माण !
हो रहा है भारत निर्माण !
आम आदमी खाता धक्के...
मौज कर रहे अधिकारी..
निर्दोषों का जीना मुश्किल...
खुले घूमते अत्याचारी...
हाँ.... नेता हैं वो इंसान...
जिनके चेहरे पर मुस्कान...
इन्हीं का बनता है हर काम !
ऐसा हो रहा है भारत निर्माण !
हो रहा है भारत निर्माण !
राष्ट्रकुल खेलों को लेकर...
हो रही है जगहँसाई...
ये किसी से छुपा नहीं...
कितना रुला रही है महँगाई...
सरकारी बेरुख़ी का मारा...
अन्नदाता किसान बेचारा...
दे रहा है अपनी जान !
ऐसा हो रहा है भारत निर्माण !
हो रहा है भारत निर्माण !
पहले कहते थे दूर करेंगे...
'समस्या' हो चाहे जितनी बड़ी...
अब कहते हैं नहीं कर सकते...
हमारे हाथ नहीं कोई 'जादू की छड़ी'...
झूँठे निकले वादे तमाम...
अधूरे पड़े हैं सारे काम...
भला करे इनका भगवान !
ऐसा हो रहा है भारत निर्माण !
हो रहा है भारत निर्माण !
आज भी जाँत-पाँत का चक्कर ऐसा...
रांझे को नहीं मिलती हीर...
ग़र हटकर कुछ बात करें तो...
देखो धधक रहा कश्मीर...
दिल्ली में सड़क पर जच्चा...
सबके सामने जनकर बच्चा...
देती अपने प्राण !
ऐसा हो रहा है भारत निर्माण !
हो रहा है भारत निर्माण !
सब जानते हुए भी ...
उपलब्धियों का ढोल पीट रहे हैं ... 
'भारत निर्माण' के सपने को... 
'हवा' में पूरा कर रहे  हैं ...
समझकर जनता को नादान...
सरकार कर रही अपना गुणगान !
तो अब समझ गए श्रीमान !
ऐसा हो रहा है भारत निर्माण !
हो रहा है भारत निर्माण !

 






21 comments:

  1. समझकर जनता को नादान...
    सरकार कर रही अपना गुणगान !
    तो अब समझ गए श्रीमान !
    ऐसा हो रहा है भारत निर्माण !
    हो रहा है भारत निर्माण !

    सारगर्भित परत-दर परत उधेड़ती रचना
    अथक प्रयास पर हार्दिक बधाई.
    चन्द्र मोहन गुप्त

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  2. हमारी सरकार के खोकले दावों की पोल खोलती एक बहुत ही कमाल की और सच्ची रचना

    वीरेंद्र जी , बहुत बढ़िया

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  3. ये शोर और निर्माण है ऐसे चक्रव्यूह का जिसमे फंसेगा आम नागरिक और सुखी होंगे राहुल गाँधी जैसे लोग ,ये सारा खेल जबरदस्ती इस देश पर थोपे गए युवराज का निर्माण का है ....शर्मनाक है ऐसा निर्माण ,घुन खा जायेगा ऐसे किसी भी निर्माण को जो गरीबों के खून और इंसानियत की कीमत पे होगा ,....

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  4. समसामयिक सटीक व्यंग ..अच्छी रचना .

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  5. भाई वीरेन्द्र जी .
    अच्छा लिखा है . चोट करता है । प्रखर लेखन ।
    प्रशंसनीय ।

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  6. इस कविता की संवेदना महसूस की जा सकती है। विषय को गहराई में जाकर देखा गया है और इसकी गंभीरता और चिंता को आगे बढ़या गया है।

    देसिल बयना-खाने को लाई नहीं, मुँह पोछने को मिठाई!, “मनोज” पर, ... रोचक, मज़ेदार,...!

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  7. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    हिन्दी का प्रचार राष्ट्रीयता का प्रचार है।

    काव्य प्रयोजन (भाग-७)कला कला के लिए, राजभाषा हिन्दी पर, पधारें

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  8. 'भारत निर्माण' के सपने को...
    'हवा' में ही पूरा कर रहे हैं ...
    समझकर जनता को नादान...
    सरकार कर रही अपना गुणगान !

    Beautiful creation !
    .

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  9. पर्त दर पर्त khokhale daawon ki खाल उतारती जबरदस्त रचना.

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  10. आप की रचना 10 सितम्बर, शुक्रवार के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपनी टिप्पणियाँ और सुझाव देकर हमें अनुगृहीत करें.
    http://charchamanch.blogspot.com


    आभार

    अनामिका

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  11. बहुत ख़ूबसूरत और लाजवाब रचना लिखा है आपने! बधाई!

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  12. मैं भी सोच रहा था इस पर कुछ लिखने की.. बहुत सही लिखा है..
    पता नहीं वो भारत कौनसा है जहाँ पर ये सब हो रहा है हम तो जिस भारत में रहते है उसकी तस्वीर अलग है

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  13. आम आदमी खाता धक्के...
    मौज कर रहे अधिकारी..
    निर्दोषों का जीना मुश्किल...
    खुले घूमते अत्याचारी...
    हाँ.... नेता हैं वो इंसान...
    जिनके चेहरे पर मुस्कान...
    सच को बहुत सुन्दर रूप में पहचाना है। वाह

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  14. आपको व आपके परिवार तथा सभी पाठकों को गणेश चतुर्थी और ईद के पावन पर्व की हार्दिक बधाईयां
    ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

    हमारे नये एगरीकेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
    अपने ब्लाग् पर लोगों लगाये यहां से
    अपने ब्लाग् को जोड़े यहां से


    कृपया अपने ब्लॉग से वर्ड वैरिफ़िकेशन को हटा देवे इससे लोगों को टिप्पणी देने में दिक्कत आती है।

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  15. सुरेन्द्र जी ..ब्लॉग पर आने के लिए धन्यवाद.
    आप व् आपके परिवार वालों को भी श्री गणेश चतुर्थी की बधाई व् शुभकामनाएँ.
    आपने वर्ड वैरिफ़िकेशनको हटाने की बात की है लेकिन मैंने अपनी ब्लॉग सेटिंग्स में पहले ही इसे 'नो' कर रक्खा है. मतलब ये होना ही नहीं चाहिए.फिर भी मैं एकबार आपके कहने से फिर से देखूँगा.

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  16. आपको एवं आपके परिवार को गणेश चतुर्थी की शुभकामनायें ! भगवान श्री गणेश आपको एवं आपके परिवार को सुख-स्मृद्धि प्रदान करें !

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  17. क्या करें...ये जानते हैं की इनके करम जैसे हैं कोई और इनका गुणगान तो करेगा नहीं,तो स्वयं ही अपना गुण सुर में गाकर कर रहे हैं...और हाँ,ये जो गीत बज रहे हैं,ये भी हमारे (आमजन) के टैक्स के पैसे से ही बज रहे हैं...
    बस अब तो जनता के हाथ ये झाल बजाना और गीत संग सुर मिलाना ही रह गया है...

    त्रासद यथार्थ को सुन्दर ढंग से बयां करती बहुत ही सुन्दर सार्थक रचना...

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