Thursday, August 26, 2010

गुरुजी बन गए गुरुघंटाल.......


एक समय था .
जब भगवान से भी ऊँचा,
गुरूओं का स्थान था .
इन गुरुओं के ज्ञान की बदौलत ही,
सदियों तक हिन्दुस्तान,
फलता-फूलता रहा था.
ये वो समय था.
जब गुरु और शिष्य के बीच,
बड़ा ही आत्मीय सम्बन्ध था.
दोनों की अनुकरणीय जुगलबंदी के दम पर ही,
हमारा प्यारा भारत,
महान बना था ...........
लेकिन अब समय बदल गया है .
अब ही वो गुरु हैं ,
और ही उनका वो स्थान है 
आज के तो गुरु ही करते वो काम है ,
कि आज गुरु को गुरु कहना भी,
'गुरु' शब्द का अपमान है .




13 comments:

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  3. आज के तो गुरु ही करते वो काम है ,
    कि आज गुरु को गुरु कहना भी,
    'गुरु' शब्द का अपमान है .

    आज के शिक्षकों की हरकते तो यही जताती हैं .....!!

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  4. आज के तो गुरु ही करते वो काम है ,
    कि आज गुरु को गुरु कहना भी,
    'गुरु' शब्द का अपमान है .

    आज की दुनिया का कटु शाश्वत वास्तविक सत्य ..

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  5. सार्थक और बेहद खूबसूरत,प्रभावी,उम्दा रचना है..शुभकामनाएं।

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  6. बेहद सही और सटीक बात कही आपने ।

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  7. बहुत ही भावपूर्ण रचना .... प्रस्तुति के लिए बधाई

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  8. गुरडम के नाम पर गुरुओं का उद्देश्य मानसिक गुलाम तैयार करना ही होता है। जो गुरु तर्क शक्ति के दुश्मन होते हैं, वे समाज का भला थोड़े ही करने वाले हैं। वे चेलों की भीड़ खड़ी करते हैं और फिर सौदेबाजी में लिप्त हो जाते हैं।

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  9. लेकिन अब समय बदल गया है .
    अब न ही वो गुरु हैं ,
    और न ही उनका वो स्थान है
    आज के तो गुरु ही करते वो काम है ,
    कि आज गुरु को गुरु कहना भी,
    'गुरु' शब्द का अपमान है ।
    पहले तो आपका धन्यवाद ,टिप्पणी के लिए, सही प्रश्न रक्खा है आपने कविता के माध्यम से , एक अच्छा गुरु ही ,सही समाज का निर्माता होता है।

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  10. सच है ... पर शिष्य का काम आज भी उसका आदर करना ही है .... उसका मान रखना ही है ...

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  11. every time you reveal another truth...nice read!!!

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