Wednesday, July 21, 2010

रेल हादसों को रोकना मेरा काम नहीं..














ये हादसा हो या कोई और रेल हादसा......
इन हादसों से नहीं मेरा कोई 'वास्ता'........
ये सभी हादसे मेरे विरोधियों की 'साज़िश' है ..
मुझे बदनाम करने की 'घटिया कोशिश' है . 
लोग इन हादसों में  मरते हैं....तो मरने दो...
मुझको तो 'मुख्यमंत्री' बनना है ...............
इस के लिए मुझे तैयारी करने दो ...........
जब  मैं  'मुख्यमंत्री' बन जाऊँगी.................
तब सबको सबक सिखाऊँगी..................
वैसे भी मैं जनता की कोई 'ग़ुलाम' नहीं
भई देश की 'मंत्री' हूँ..... कोई 'आम इंसान' नहीं .....
जो मरने वालों को बचा ले मैं वो 'भगवान' भी नहीं..
हादसे न हो इसके लिए तो योजना बनानी होगी..
दिमाग़  लगाना होगा, मेहनत करनी होगी.....  
और ऐसे 'बेकार कामों' के लिए मेरे पास 'समय' नहीं..
वैसे भी मेरे पास 'फ़ालतू दिमाग' नहीं..... 
न जाने  लोग मुझे समझते क्यों नहीं ?
कितनी बार कहा है....पर कोई सुनता ही नहीं....
मुझे तो पहले ही दो पल का 'आराम' नहीं.......
अब तो बस..मुख्यमंत्री की कुर्सी दो , 'इल्ज़ाम' नहीं ..
इसलिए मेरी आलोचना करने वालों ................
कान खोलकर फिर से सुन लो................
इस तरह करो मुझे 'बदनाम' नहीं  .......  
इन रेल हादसों को रोकना 'मेरा काम' नहीं.

4 comments:

  1. फिर किसका काम है....
    ***********************

    'पाखी की दुनिया' में आपका स्वागत है.

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  2. मंत्री जिम्मेदार नहीं ।
    जनता को एतबार नहीं ।
    प्रशंसनीय रचना ।

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  3. too good..it's really sad....itne train accidents hote hain...aur sab apna palla jhaad lete hain...koi kuch nahi karta...

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