Monday, July 5, 2010

मैं भी नेता बनूँगा .........

















मैं भी नेता बनूँगा ।
देश के लिए कुछ करूँ या न करूँ ,
अपने घर को तो मैं ज़रूर गुलज़ार करूँगा।
इसलिए मैं भी नेता बनूँगा ।
क्या हुआ जो मैं अनपढ़ हूँ , बेकार हूँ ...
मेहनत से कमा कर खाने में लाचार हूँ ....
लेकिन राजनीति का तो मैं अनार हूँ ....
लोगों को बरगलाने में भी होशियार हूँ ।
शराब व शबाब का बन्दा शौक़ीन है ....
आम नागरिक की तरह रहने में तो मेरी तौहीन है.
रंग बदलने में भी माहिर हूँ ....
मैं अव्वल नंबर का शातिर हूँ ....
राजनीति में रंग जमाने को आतुर हूँ ।
ज़माना भले ही मुझसे परेशान है ...
मेरी ताक़त को देख कर हैरान है ।
सब कहते हैं तू गुंडे -मवालियों का खेवनहार है ....
इसीलिए वो मुझसे पीछा छुड़ाने को बेक़रार हैं ।
पर मैं ऐसा हरगिज़ नहीं होने दूँगा....
उनसे वोट तो मैं लेकर ही रहूँगा....
फिर मैं अपने साथ थोड़ा सा ....
उनका भी तो भला करूँगा ....
कुछ बदमाशों को जेल में भरूँगा ....
तो कुछ ख़ास को पैरोल पर रिहा करूँगा ।
इसलिए मैं कहता हूँ ....
मैं भी नेता बनूँगा।
जो कहते हैं मैं कुछ नहीं कर सकता....
ईमानदारी से दो पैसे भी नहीं कमा सकता....
उनसे मैं सिर्फ इतना ही कह सकता हूँ ....
कि मैं नेताओं वाले सभी काम कर सकता हूँ .....
जानवरों का चारा हज़म कर सकता हूँ ....
रातों-रात करोड़पति
/ अरबपति बन सकता हूँ ....
बड़े से बड़ा घोटाला कर सकता हूँ ....
लोगों को आपस में लड़वा सकता हूँ ....
बातों से ही मैं लोगों का ख़ून बहा सकता हूँ ....
अपने फ़ायदे के लिए किसी को भी मरवा सकता हूँ।
अपने बारे में और ज़्यादा क्या कहूँ ....
बस इतना और कह सकता हूँ ....
कि मौक़ा मिलने पर ही मैं अपना असली रंग दिखा सकता हूँ ।
और दावे के साथ ये कहता हूँ ....
मैं एक ख़ास वर्ग वालों का चहेता हूँ ....
अक्सर मैं उनसे चंदा लेता हूँ ।
कुछ उनकी भलाई के नाम पर ख़र्च करता हूँ ....
बाकी मैं रख लेता हूँ ।
उनके हक़ के नाम पर ....
मैं शानदार राजनीति करूँगा ।
इसलिए मैं कहता हूँ ...
मैं भी नेता बनूँगा।
देश के लिए कुछ करूँ या न करूँ,
अपने घर को तो मैं ज़रूर गुलज़ार करूँगा.
मैं भी नेता बनूँगा.

नोट -: ये सच है कि सारे नेता एक से नहीं होते, हमारे देश में बहुत से ऐसे नेता हुए हैं जिन्होंने अपने निजी स्वार्थों से उपर उठकर देश हित में अच्छे-2 काम किए हैं. ये नेता बहुत ही क़ाबिल थे, लेकिन आजकल ऐसे नेता कुछ कम ही हैं. दूसरी बात, देश को चलाने के लिए नेता ज़रूरी भी हैं. लेकिन वहीँ दूसरी तरफ़ कुछ ऐसे लोग भी नेता बन गए या बन रहे हैं जो किसी लायक़ ही नहीं हैं. ऐसे नेता केवल अपना ही भला देखते हैं , देश की चिंता ये बिल्कुल नहीं करते. ये व्यंग्य ऐसे ही नेताओं पर है. ये नेता शायद ही किसी दूसरे काम के लायक़ हों . अगर ब्लॉग पाठक अच्छा नेता हो या बनना चाहता या चाहते हों तो मेरी शुभकामनाएँ उनके साथ हैं. अच्छे नागरिकों की तरह अच्छे नेताओं की भी देश को बहुत ज़रुरत है, और आम जनता भी उनका पूरा सम्मान करती है. चूँकि आप सब जानते हैं इसलिए मैं अपनी बात यहीं ख़त्म करता हूँ.

धन्यवाद


8 comments:

  1. बाकी मैं रख लेता हूँ ।
    उनके हक़ के नाम पर ....
    मैं शानदार राजनीति करूँगा ।

    Bahut shaandar rachna !

    Itna sundar Vyang pehle kabhi nahi padha. aapke blog par aana safal ho gaya.

    Badhaii.

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  2. aaj divya ji ke blog par aaye hue comments ko padhte hue aapke blog par aana hua

    APNE SAPNON KI UDAAN DEKHKER, KHUD HI HO JATA HUN SHARMINDA. CHUMNA CHAHTA HUN AASMAN KE DAAMAN KO.................., MAIN...BANKAR......AAZAAD.......................PARINDA.

    sach mein aapke blog par maujood ye lines dil le gayein

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  3. आप आज़ाद परिन्दा हैं और हम हैं "नादान परिंदा" सारे दोस्तों ने मिल कर ये नाम रखा है… :) :)

    आपका ब्लाग मुझे अच्छा लगा… अपना टाइटिल जो था :)

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  4. जानवरों का चारा हज़म कर सकता हूँ ....lol...bilkul sach likha hai ....abuhat hi karara vyanga...saari 'qualities' bata di aapne....too good!

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  5. प्रशंसनीय । नोट लिखकर बात को वजनदार कर दिया ।

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  6. आज के ऐसे नेताओं पर करार व्यंग जो केवल अपना ही भला सोचते हैं...सुन्दर अभिव्यक्ति

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  7. सही जा रही है कविता ...
    जरुर नेता बनोगे ...

    आज के नेताओं पर अच्छी व्यंगात्मक रचना ...!

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  8. aaj netaaon ki bahut shakht jarurat hai is desh or samaj ko ...aap hi baniye kuch to kariye

    accha chintan hai aapka ..jise aapne vyang roop diya hai

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