Wednesday, June 30, 2010

वतन की आन में और तिरंगे की शान में.......

















भारत माता के ऐसे-2 सपूत हैं हिन्दुस्तान में...
जो मिटने को भी तैयार हैं वतन की आन में.....
ये सच है कि हम शान्ति के
दूत हैं, पुजारी हैं....
पर माफ़ न करेंगे, गुस्ताख़ी तिरंगे की शान में।

4 comments:

  1. आपको हिंदी में ब्लॉग लेखन के लिए बधाई। रचना पढ़कर अच्छा लगा।
    स्वागत है!

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  2. खूबसूरत पंक्तियाँ...
    मेरे ब्लॉग पर आने का बहुत शुक्रिया.
    जय हिंद.

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