Saturday, June 5, 2010

५ जून -पर्यावरण दिवस पर चंद पंक्तियाँ..........













बदलता
हुआ मौसम हमको चेता रहा है ....

संभल जाओ वरना जीवन का अंत आ रहा है ।

बढ़ते हुए प्रदूषण से जल, थल, और नभ में ...
पैदा हुई कितनी बड़ी-बड़ी समस्याएँ हैं ।
इन से उत्पन्न भयानक संकट के सामने....
मनुष्य और दुसरे जीव, सभी कितने असहाय हैं ।
धरती का तापमान भी लगातार बढ़ता जा रहा है ।

बदलता हुआ मौसम हमको चेता रहा है ......
संभल जाओ वरना जीवन का अंत आ रहा है ।

प्रकृति का मनोहारी और विस्मयकारी रूप.....
इंसानी करतूतों से रोज़-रोज़ तबाह हो रहा है।
हरे-भरे पेड़-पौधों के काटे जाने से......
पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ रहा है।
अब तो पानी भी ज़हरीला हो रहा है ।

बदलता हुआ मौसम हमको चेता रहा है ....
संभल जाओ वरना जीवन का अंत आ रहा है ।

कभी बाढ़ तबाही मचाती है ....
तो कभी सूखा क़हर ढाता है ।
फिर-फिर धरती काँप उठती है .....
और एक पल में ही मंज़र बदल जाता है ।
गर्मी हो या सर्दी, दोनों से ही इंसान मर रहा है ।

बदलता हुआ मौसम हमको चेता रहा है.....
संभल जाओ वरना जीवन का अंत आ रहा है ।

2 comments:

  1. very very nice virender ji ,,bahut hi badhiya likhte ho,,god bless u....
    संभल जाओ ऐ दुनियां वालो नहीं तो एक दिन बेमौत मरे जाओगे.
    हर इंसान एक पेड़ लगाए तो शायद मौत के खौफ को दूर भगा पाओगे

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