Tuesday, May 25, 2010

न बुझने बाली प्यास....













जो
कभी बुझती ही नहीं , लगी है ऐसी प्यास,

शायद मेरे दिल को अब भी है , तेरे आने की आस.


3 comments:

  1. sundar ....achha likha hai ise hi umeed kahte hai ....meri nayi rachna par apne amulya sujhaav de
    http://athaah.blogspot.com/

    ReplyDelete
  2. क्या आशिकाना अंदाज़ है ........ बहुत खूब .......

    ReplyDelete
  3. मेरे ब्लोग मे आपका स्वागत है
    क्या गरीब अब अपनी बेटी की शादी कर पायेगा ....!
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com/2010/05/blog-post_6458.html
    आप अपनी अनमोल प्रतिक्रियाओं से  प्रोत्‍साहित कर हौसला बढाईयेगा
    सादर ।

    ReplyDelete