Friday, May 7, 2010

मैं वो रंगबाज़ नहीं

देखकर दुनिया के रंग- ढंग, मेरा दिल धड़कता है,

मैं वो रंगबाज़ नहीं, जो मौका  देख रंग बदलता है ।

1 comment:

  1. रंग बदलने पर अर्ज़ है....
    देखा नहीं कभी गौर से, तूने मुझे ऐ रफीक!
    आज जब देखा है तो, तू क्यूँ इतना दंग है?
    कल जिसमे भीगा था मैं, वो भी मेरा एक रंग था!
    आज जिसमे डूबा हूँ मैं, वो भी मेरा एक रंग है!

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